कश्ती में बैठकर पानीसे डरा नहीं करते.
खुदपे भरोसा न हो तो साहस किया नहीं करते,
तूफ़ान कभी भी बता कर आया नहीं करते,
उसी खौफ के मारे रोज-रोज मरा नहीं करते.
हरेभरे पेड़ काटने पर भी फूटती है नयी टहनियाँ,
फूलों को तोड्ने पर भी उग आती है नयी कलियाँ,
खाली हो जाने पर फिर से भर जाती है नदियाँ,
एक इंसान ही है जो टूटने के बाद संभल पाता नहीं है.
जैसे ताने-बाने बुनकर कपड़ा बनाया जाता है,
वैसे ही सूख-दुःख बुनकर जीवन संवारा जाता है,
एक भी तार टूटने से दोनों उधड जाते है,
और जोडने पर गाँठ पड जाती है.